कैसे निपटें इकनॉमिक स्लोडाउन से

हर्षवर्धन सिंह उचियारडा कहते है कि केंद्र सरकार 8 की गई नोटबंदी के कारण देश की इकोनॉमी में स्लोडाउन ठठरावःसा आ गया है। नोटबंदी होने के कारण देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है। नोटबंदी के बाद से बाजार से इंवेस्टर गांबब हो गए है। बाजार में कैश फ्लों कम होने के कारण रियल एस्टेट * समेत एमएसएमई उद्योगों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।’ लोगों के पास नकदी का प्रवाह नहीं होने के कारण सौदे नहीं हों’ रहे है। नोटबंदी व जीएसटी के बाद से बाजार से इंवेस्टर गायब हो गया है। वहीँ रियल एस्टेट | सेक्टर में डिमांड कम व सप्लाई. अधिक होने के कारण रियल | एस्टेट सेगमेंट की हालत | दयनीय “बनी हुई है। इन तीनों «| की मार रियल एस्टेट सेगमेंट पर साफ तौर पर दिखाई पड़ती है।

रेरा के बाद बढ़ी पारदर्शिता : उचियारड़ा नें बताया कि रेंरा कानून के आने के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ी है।लोकल आऑथोरिटी निष्पक्ष रूप के साथ-साथ समय-पर प्रोजेक्ट लांगत बढ़ने के साथ ग्राहकों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधडी नहीं होती है। रियल एस्टेट क्षेत्र में अ छे ग्रुप मार्केट में है । बन , टाइम प्लेयर बाजार से गायब हो गए है, लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अच्छे कदम उठाए जाने के साथ बिल्डरों को प्रोत्साहन पैकेज मुहैया करवाएं, यह समय की मांग है।

जीएसटी से जेब पर पड़ रहा अतिरिक्त भार : उचियारड़ा ने बताया कि वर्तमान में 45 लाख रुपए से कम राशि वाले अफोर्डबल हाउसिंग पर एक फीसदी जीएसटी एवं 45 लाख रुपए से ऊपर के आवासीय फ्लैटों पर 5 फीसदी जीएसटी है, जिसके कारण ग्राहकों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। मंदी के दौर से गुजर रहे रियल एस्टेट को उबारने के लिए जीएसटी कॉउंसिल जीएसटी को समाप्त करें । जीएसटी के कारण ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

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